अकेले जिंदगी शायरी

सुकून कही नहीं है दोस्त हमने अकेले और रिश्तों दोनों का एहसास किया है।

दिल में गम छिपाकर महफ़िल में मुस्कुराया हूँ, कितना अकेला हूँ मैं ये बात हर किसी से छुपाया हूँ।

नाराजगी किसी से नहीं ज़िन्दगी से थोड़ी सिकायत है, अकेलेपन से बहोत उब गया अब सुकून की चाहत है।

मैं अकेला हूँ अपना पुराना जूनून खोज रहा हूँ… महफ़िल से दूर मैं सुकून खोज रहा हूँ।

दिल में तन्हाई के सिवा कुछ नहीं बचा है, हमारे तन्हाई के किस्से पर महफ़िल में लोगों से हंसा है।

झूठी मुस्कान होठों पर दिखानी पड़ती है, दिल के जज्बात हर कोई नहीं समझ सकता।

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