अपनी जिंदगी की शायरी

क़त्ल से पहले वो हर शख़्स के दिल की हसरत पूछ लेता था मगर पूरी नहीं करता था

जिंदगी के उस मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ यह समझ नहीं आ रहा है,  हम जिंदगी के मजे ले रहे हैं, या जिंदगी हमारे मजे ले रही है।

छोटी सी जिंदगी है अरमान बहुत है,  हमदर्द नहीं कोई इंसान बहुत है,  दिल का दर्द सुनाए तो किसको,  जो दिल के करीब है,  वो अनजान बहुत है।

जिंदगी के रथ में लगाम बहुत है, अपनों के अपनों पर इल्जाम बहुत हैं, शिकायतों का दौर देखता हूँ तो थम सा जाता हूँ,   लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है।

यहाँ सब कुछ बिकता है दोस्तों, रहना जरा संभाल के, बेचने वाले हवा भी बेच देते है, गुब्बारों में डाल के।

ज़िंदगी की किताब में इतनी ग़लतियाँ ना करो, की पेंसिल से पहले रबड़ खत्म हो जाए,  और तौबा करने से पहले ज़िंदगी खत्म हो जाए।

Read More