जिंदगी शायरी दो लाइन sad

हम अक्सर बोलते थे कि नसीब नही बदलता है रोने से, ज़िन्दगी भर रोये नही हम बस इसी तस्सली से ।

एक वो समय था जब समय था, आज ये समय है कि समय ही नहीं ।

ये कशमकश है कैसे बसर ज़िन्दगी करें, पैरों को काट फेंके या चादर बड़ी करें।

डूबना नहीं था ज़िन्दगी की नैय्या में , इसलिए मैंने सपनो की नांव तैयार रखी।

ज़िंदा रहने की अब ये तरकीब निकाली है, ज़िंदा होने की खबर सबसे छुपा ली है।

काश मैं अपनी ज़िन्दगी का लाडला होता , जीत मेरी ही होती ,चाहे कोई भी मामला होता।

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