बहुत ही सैड शायरी boy

जिनसे कोई उम्मीद नहीं होती अक्सर वही लोग बुरे वक़्त मे साथ निभा जाते हैं.

लोग सर फोड़ कर भी, देख चुके ग़म की दीवार टूटती ही नहीं!

जितना बदल सकते थे बदल लिया खुद को..! अब जिसको शिकायत हो वो अपना रास्ता बदल ले

ये भी उसकी मोहब्बत थी कि उसने अपने, घर की सभी दीवारें छोड़कर मुझे चूना लगाया.!!

उन लम्हों का हिसाब नहीं चाहिए, जो तुम पर ख़र्च हुए… बस वो वक़्त लौटा दो, जो तुम्हारे साथ बीता.

हम आपसे इश्क ही कुछ इस तरह करेंगे, आप चाह कर भी हमसे जुदा न रहे सकोगे।

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