माँ के लिए कुछ शायरी

“कौन सी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती,  सब कुछ मिल जाता है पर माँ नहीं मिलती..”

माँ तेरे दूध का हक मुझसे अदा क्या होगा! तू है नाराज ती खुश मुझसे खुदा क्या होगा!

कभी चाउमीन, कभी मैगी, कभी पीजा खाया लेकिन, जब मां के हाथ की रोटी खायी तब ही पेट भर पाया।

“घर में धन, दौलत, हीरे, जवाहरात सब आए, लेकिन जब घर में मां आई तब खुशियां आई..”

रूह के रिश्तो की यह गहराइयां तो देखिए, चोट लगती है हमें और दर्द मां को होता है।

हर घड़ी दौलत कमाने में इस तरह मशरूफ रहा मैं, पास बैठी अनमोल मां को भूल गया मैं।

Read More