सैड शायरी दो लाइन का

लोग कहते है हर दर्द की एक हद होती है, शायद उन्होंने मेरा हदों से गुजरना नहीं देखा।

पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है, फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह।

सोचा न था वो शख्स भी इतना जल्दी साथ छोड़ जाएगा जो मुझे उदास देखकर कहता था.. मैं हूँ ना।

ज़ख्म दे कर ना पूछ तू मेरे दर्द की शिद्दत, दर्द तो फिर दर्द है कम क्या ज्यादा क्या।

हालात कह रहे है अब वो याद नही करेंगे ओर उम्मीद कह रही है थोड़ा और इंतजार कर।

अब मेरे हाल चाल नहीं पूछते हो तो क्या हुआ कल एक एक से पूछोगे की उसे हुआ क्या था

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