4 दिन की जिंदगी शायरी

इस चार दिन की जिंदगी में, हम अकेले रह गए, मौत का इंतजार करते करते, अकेलेपन से मोहब्बत कर गए।

सूने घरों में रहने वाले कुंदनी चेहरे कहते हैं, सारी सारी रात अकेलेपन की आग जलाती है।

मेरा अकेलापन ही मेरा साथी हैं, मुझे किसी और की ज़रूरत नहीं, क्या करे किसी से रिश्ता जोड़ कर, जब की मुझे जिंदगी में और दर्द की ज़रूरत नहीं।

मेरा नसीब अच्छा था जो तेरा दीदार हो गया, पहले मैं अकेली थी और अब अकेलेपन की शिकार हो गयी।

अकेलापन दिलजलों को खूब भाता है, यादों के मारों को सुकून, तन्हाई में ही मिल पाता है।

भीड़ में ये अकेलापन मुझसे मिलने जब आया, क्या है ये अकेलापन मुझे समझ में तब आया।

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