dosti attitude shayari 2 line

मैं तो जिंदगी का दर्द-ए सितम बयां करता हूं, लोग इसे ही मेरी शायरी समझ लेते हैं।

 अकेले ही गुजर जाया करती है जिंदगी, लोग तसल्ली तो देते हैं पर साथ नहीं।

खुली किताब रही है जिंदगी मेरी, जिसने जैसे चाहा वैसे पढ़ा, बस पढ़ न पाए वो अल्फाज मेरे दिल के।

अपनी जिंदगी की बस यही कहानी, कुछ खुद बर्बाद हुए और कुछ उनकी मेहरबानी।

 जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं है मुझे, पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते।

मेरे जज्बात वाकिफ हैं मेरी कलम से, मोहब्बत लिखता हूं, तो तेरा नाम लिखा जाता है।

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